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Accha Hua Ratan Lal Hangloo Ji Aap Chale Gaye !
education 03-Jan-2020 Updated on 1/4/2020 2:00:07 AM

Accha Hua Ratan Lal Hangloo Ji Aap Chale Gaye !

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डियर रतन लाल हांगलू .......अच्छा हुआ तुम चले गए !

इलाहाबाद विश्विद्यालय जो कि आईसीयू में चल रहा था अब जाकर नया शॉक पाकर मानो जागृत हो गया है. चारो तरफ से घिरने के बाद भ्रष्ट, कुशिक्षक, अत्याचारी, छात्र-विरोधी, लीचड़ और शैतान प्रवृति वाले वाईस-चांसलर श्रीमान रतन लाल हांगलू को तत्काल इस्तीफा देकर अपना बोरिया-बिस्तर लपेट कर घर की और लौटने को मजबूर हो चुके हैं. उनके साथ ही नाम भर के प्रॉक्टर रहे राम सेवक दुबे ने भी इस्तीफा देकर खुद को बचाना ही मुनासिब समझा. 

एक सवाल नहीं कई सवाल फिर खड़े रह जाते है जैसे लेकिन क्या इससे सब कुछ ठीक हो जायेगा? इस आदमी ने एक काम तो अच्छा कर ही डाला था और वह थी घटिया, हिंसक और छात्र-विरोधी छात्र संघ की राजनीति का खात्मा जहाँ विधायिकी-पार्षदी पाने को उतावले बेरोज़गार अधेड़ उम्र के लोग खुद को छात्र बताकर यूनिवर्सिटी के होस्टल्स पर डेरा जमाकर बैठे हुए थे. 

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छात्र राजनीति दोबारा जागृत हो गई है. अब तक जिन पर एफआईआर दर्ज़ हो रखी थी वह आज कैंपस में साफ़-पाक होकर ऐसे घूम रहे है, ऐसे रंगीन मिज़ाज़ी दिखाकर जश्न की होली मना रहे हैं. इसे यह लोग बहुत बड़ी उपलब्धि बताकर छात्र राजनीति का संघर्ष बता रहे हैं मानो इससे सबकी बेहतरी हो जाएगी जबकि वास्तविकता में यह इन्हीं का स्वार्थ को फलित करेगी. 

हाँ, अच्छा ही हुआ कि रतन हांगलू चले गए क्योंकि अब अति हो चुकी थी करप्शन, कुव्यवस्था, स्कैम्स, हिंसा, शोषण और बदतमीज़ी की. पूर्वर्ती छात्र होने के नाते भी मैं बिना किसी संकोच के कह सकता हूँ कि अच्छा ही हुआ कि यह औरतों से अश्लीलता करने वाला, छात्रों पर दमन करने वाला, पढाई ठप करवाने वाला, छात्र एवं छात्रों को सुविधाओं से वंचित रखने वाला शख्स जिसे कोई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी वाला छात्र शायद ही अपना स्टूडेंट मान सके. 

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में वैसे ही काला अँधेरा बसरा हुआ है जो दीर्घकालीन प्रतीत होता है लेकिन हांगलू के जाने से केवल एक छोटी रोशनी का छेद ही उभर पाया है और कुछ नहीं. चीज़ें बदलने के लिए बदलाव नहीं क्रान्ति की ज़रुरत है. 

Accha Hua Ratan Lal Hangloo Ji Aap Chale Gaye

निराला आर्ट गैलरी में कथित स्वपोषित संस्था सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज के कोर्स को-ऑर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा उर्फ़ डीसी (असली नाम : डॉ दाऊद चउसकर) को प्रोफेसर न होकर भी इस पद पर बने रहने की वजह से पढ़ाने ही नहीं क़ुराज स्थापित करने की अनुमति दी जाती है जिसकी आड़ में यह मुस्लिम तुष्टिकरण, जिहाद और वामपंथ की सोच में कल के मीडिया प्रोफेशनल्स युवा छात्रों का ब्रेनवॉश करता है. साहिल सिंह नामक छात्रों को इसकी वजह से अपना हिन्दू धर्म छोड़ने पर भी मजबूर किया जाता है.  

अब हांगलू तुम तो चले गए लेकिन तुम्हारे यार-चेले जो डीसी जैसे है वह तो बने हुए है न? ऐसे में लड़कियों की सुरक्षा एवं सम्मान कहाँ रह जायेगा ? पढाई कहाँ होगी ? कोई आयोजन कहाँ से होगा ? आखिर छात्रसंघ के ठेकेदार नेता उठ क्यों नहीं नहीं खड़े होंगे ? अभी बहुत कुछ होना बाकी है ताकि सब ठीक हो सके ......इसलिए फिलहाल के लिए शुर्किया श्री रतन लाल हांगलू तुम चले गए ....अच्छा ही हुआ फिलहाल के लिए. 

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